युवा आइंस्टीन ने सोचा कि वह प्रकाश की एक किरण पर सवार हैं और उसके बाद के पर्यवेक्षण ने उन्हें विशेष सापेक्षता के अपने प्रसिद्ध सिद्धांत का निरूपण करने के लिए प्रेरित किया। लेकिन सैद्धांतिक भौतिकी के अगुआ लोगों का 'द चेंज विदिन' यानी अपने भीतर के परिवर्तन से क्या लेना-देना? मगर ऐसा है!
यहाँ पर, एक वैचारिक प्रयोग दिमाग में आता है : यदि आपको किसी संकट की स्थिति में अपना घर खाली करना पड़े और एक ही सूटकेस भर ले जाने को मिले, तो आप उसमें क्या ले जाएँगे?
अपनी चेक बुक? अपनी बीमा पॉलिसी? अपने हीरे ? नकद पैसे? अपनी प्रार्थना की किताबें ? अपने फोटो एलबम्? निश्चित रूप से उस सूटकेस में थोड़े से कपड़े होंगे। लेकिन बाकी चीजें यह निर्धारित करेंगी कि आप किस प्रकार के व्यक्ति हैं। यह सही है कि कुछ संपन्न लोग इस बात को लेकर परेशान होंगे कि वे किस प्रकार के कपड़े ले जाएँ : औपचारिक या पार्टी में पहननेवाले परिधान या कैजुअल कपड़े? जब वे अपने घरों से बाहर निकलेंगे कि मीडिया के सामने वे खुद को कैसे प्रस्तुत करेंगे?
साधारण आय और घरोंवाले लोग पाएँगे कि उनके विकल्प पहले से तैयार हैं। उनके पास व्यक्तिगत चीजों का इतना विशाल संग्रह नहीं होता।
उसके बाद क्या? संपन्न लोग स्वाभाविक रूप से अपनी संपत्ती अपने साथ ले जाना चाहेंगे और एक सूटकेस उनके लिए पर्याप्त नहीं होगा। हर हालत में, उनके लिए अपनी धन-दौलत से बढ़कर कीमती कुछ नहीं है।
कुछ कम संपन्न लोग अपने साथ कम-से-कम यादों भरा एक एलबम ले जाने की सोच सकते हैं; वैसे भी स्मृतियों के बिना जीवन कैसा होगा?
संवेदनशील लोग अपने सामान में कम-से-कम एक पुस्तक शामिल कर सकते हैं, जो उन्हें उपयोगी लगे।
आध्यात्मिक लोग प्रार्थना की किताब रख सकते हैं। और खिलाड़ी हॉकी स्टिक या क्रिकेट का बल्ला रख सकते हैं...।
हमारा मस्तिष्क भी ऐसा ही एक सूटकेस है। आपको कभी-न-कभी यह निर्णय लेना होगा कि आपको क्या आगे ले जाना है और क्या छोड़ना है। आपको अपने मन के सूटकेस से अतिरिक्त भार हटाने की जरूरत है। प्रतिशोध, कड़वी यादों, चिंताओं और नकारात्मक विचारों का बोझ त्यागने की आवश्यकता है और सामानवाले सूटकेस की आपके दिमाग में मौजूद विचार भी यह दरशाएँगे कि आपका व्यक्तित्व किस प्रकार का है।
ऐसे और वैचारिक प्रयोगों के बारे में सोचें। ये आपको वास्तविकता से जोड़े रखेंगे, जो आपके लिए बेहद जरूरी है।
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