आपको अब भी कभी कभी उन मित्रों की याद आ जाती होगी, जो आपके घर आया करते थे; वे सच्चे मित्र थे। वे साधारण घरों के, लेकिन बहुत ईमानदार थे। आप उनके साथ सहज रह सकते थे और अपने असली रूप में उनके सामने आ सकते थे। आपको उनके सामने दिखावा करने या अपनी नई उपलब्धि का प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं थी। वे ऐसे लोग थे, जिन पर आपका परिवार जरूरत या संकट के समय भरोसा कर सकता था; और हमारे साधारण जीवन को देखते हुए, यह समय आता ही रहा होगा।
जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो यह पाते हैं, कि सामुदायिक भावना अब बहुत कमजोर और हलकी हो गई है। यहाँ तक कि दोस्त भी उँगलियों पर गिने जा सकते हैं, जबकि हमारे पिताजी के या दादाजी के मित्र हर कहीं थे।ऐसे समय में, जब हमारे पास सबसे आधुनिक दूरसंचार सुविधाएँ हैं, ऐसा क्यों हो रहा है? ऐसा क्यों है कि हम एक ही शहर में रहनेवाले मित्रों से संपर्क में नहीं रह पाते, लेकिन नई सोशल नेटवर्किंग साइटों के माध्यम से दुनिया के दूसरे सिरे पर मौजूद अन्य लोगों से संपर्क कर लेते हैं?
हम सभी इसका उत्तर जानते हैं। समय और अवसर की कमी, लेकिन उससे अधिक इच्छा की कमी और हमारी महत्त्वाकांक्षा। हम अब सिर्फ उन्हीं से मित्रता करते हैं जिन्हें हम जानना चाहते हैं और जैसे ही वे हमारे लिए अनुपयोगी हो जाते हैं, उन्हें छोड़ देते हैं। अपनी पुरानी डायरियों और विजिटिंग कार्डों की ओर देखिए तो आपको बात समझ में आ जाएगी।
वास्तविकता तो यह है कि मित्रता निभाना बहुत महत्वपूर्ण है। मित्र हमारा तनाव कम करते हैं। वे हमें बाहरी दुनिया के साथ संपर्क करने में मदद करते हैं।
यह दु:खद है कि अधिकांश मामलों में, खासकर शहरों और नगरों में, हम बराबरीवालों और कार्यालय के सहकर्मियों में से अपने मित्र चुनते हैं। इससे हम खाली समय में भी क्या बन जाते हैं। छुट्टी के दिन भी सहकर्मियों से ऑफिस के बारे में बात करते हैं? फिर से अपना गुस्सा निकालते हैं कि फलाँ मीटिंग में फलाँ ने आपके साथ कैसा व्यवहार किया।
महिलाओं के लिए, सहेलियों के साथ संपर्क में रहना और भी आवश्यक है क्योंकि अध्ययनों से पता चला है कि महिलाओं को अधिक स्नेह, देखरेख और सांत्वना की जरूरत होती है, जितनी उनके पति उन्हें नहीं दे पाते। यह सिद्ध है कि बहनापा बहुत आवश्यक है, क्योंकि महिलाएँ अन्य महिलाओं को बेहतर समझती हैं, चाहे वे जहाँ भी रहें। हाँ, गॉसिपिंग महिलाओं के लिए वाकई अच्छा है, यह बात साबित हो चुकी है।
इसलिए पुरानी डायरेक्टरी निकालिए और उस मित्र को फोन लगाइए जिससे आप कॉलेज के बाद से नहीं मिले हैं। जब आप बीते दिनों की बात करेंगे, आप अपने प्रोफेसरों के पुराने चुटकुलों पर हँसेंगे तब आपका रक्तचाप निश्चित रूप से कम हो जाएगा।
और ईश्वर का आभार व्यक्त करें कि आपके पास अब भी ऐसे मित्र हैं, जिन्हें आप फोन कर सकते हैं।
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