मनुष्यों के रूप में हम सब गलतियाँ करते हैं और जीवन को अपने सर्वोत्तम ज्ञान के साथ जीते हैं। कोई भी व्यक्ति अपने या किसी और के जीवन में परेशानी खड़ी करने के इरादे से गलतियाँ नहीं करता। कभी कभी हम मूर्खतापूर्ण कार्य करते हैं और विनाशकारी गलतियाँ कर देते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि हम सिर्फ उसी तरह से जीवन जीना जानते हैं। कोई भी अपने खुद के जीवन में उलझनें नहीं पैदा करना चाहता ।
बात सिर्फ इतनी होती है कि उनके पास एक खुशहाल व स्वस्थ जीवन जीने के लिए पर्याप्त ज्ञान नहीं होता। हम मनुष्य हैं, रोबोट नहीं जिनके अंदर एक त्रुटिहीन सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग डाल दिया जाता है।हमारे लिए नई नई गलतियाँ करना और हर बार उनसे कुछ सीखना स्वाभाविक है। लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम कभी उन्हीं गलतियों को दोहराएँ नहीं । आखिरकार, हमारे पास करने के लिए असीमित गलतियाँ हैं, तो उन्हीं गलतियों को बार-बार क्यों दोहराएँ ?
किसी को गलतियाँ करना अच्छा नहीं लगता। लेकिन यदि आप पूर्ण रूप से वैराग्य का जीवन नहीं जीना चाहते, तो समय समय पर आपका गलतियाँ करना तय है। यदि आप अपनी गलतियों से सही सीख लेते हैं तो वे आपको आगे बढ़ा सकती हैं। आपको ये भी समझना चाहिए कि गलतियाँ आत्म-सुधार का अनिवार्य हिस्सा हैं। अफसोस और अपराध-भाव से अभिभूत न हों; इस बात का विश्लेषण करें कि आप उनसे कैसे सीख सकते हैं।
चाहे हमारी गलतियाँ कितनी भी बड़ी हों, हम सब दूसरा अवसर पाने के अधिकारी हैं, और आप भी अपवाद नहीं हैं। इसलिए यदि आपने कोई गलती की है, तो ये आपके लिए एकमात्र सजा है - अब से एक बेहतर व्यक्ति बन जाएँ।
'एक समृद्ध अपराध-बोध से बड़ी कोई सजा नहीं है । '
- विलियम ई. चेनिंग
यदि आपने ऐसी गलतियाँ की हैं, जिनसे दूसरों का नुकसान हो रहा है, तो एक सम्मानजनक माफी की पेशकश करना महत्त्वपूर्ण है । माफी माँगते समय स्पष्ट करें कि वह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, जो दोहराई नहीं जाएगी। एक अच्छी माफी विश्वास बहाल करने में बहुत मदद कर सकती है।
यदि आप शर्मिंदगी या अनिच्छा के कारण माफी नहीं माँगेंगे, तो आहत व्यक्ति इस बात को आपके खिलाफ मन में दबा कर रखेगा। यदि आपकी माफी में ईमानदारी है तो संभावना है कि वह आपको माफ कर दे। सामने जाकर व्यक्तिगत रूप से माफी माँगना एक रूखे इ-मेल के माध्यम से माफी माँगने से अधिक प्रभावी होता है। हालाँकि एक बार माफी माँग लेने के बाद उसी बात के लिए बार-बार खेद प्रकट करना गलत होता है। कुछ लोग एक ही बात के लिए बार-बार माफी माँगते रहते हैं। इससे सामनेवाला परेशान हो जाता है। इससे बेहतर है कि आप एक बार ईमानदारी से माफी माँगकर आगे बढ जाएँ।
दुर्भाग्य से अपने कृत्यों का औचित्य साबित करना हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। जब आप कोई गलती करते हैं, तो पहली प्रतिक्रिया होती है किसी और को दोषी ठहराना।
जब गलतियाँ होती हैं तो स्पष्टीकरण में सामने वाले की शायद ही कभी दिलचस्पी होती है। हम अपनी गलतियों को सही साबित करने की कोशिश करते हैं, अपने अहं के कारण। कभी-कभी सीधे से ये कह देना सबसे अच्छा होता है कि हाँ, मुझसे गलती हो गई।
आपको गलतियाँ करने पर अपराध-भाव महसूस करने से बचना चाहिए; लेकिन साथ ही आपको उनसे सबक लेने का संकल्प भी लेना चाहिए। यदि आप वही गलतियाँ बार-बार दोहराते रहते हैं तो इसका मतलब है कि आप प्रगति नहीं कर रहे हैं और इससे आपको बार-बार पीड़ा होती है।
कई बार गलतियाँ बुरी आदतों के कारण होती हैं। उन्हीं गलतियों को बार-बार दोहराने से बचने के लिए आपको ये बुरी आदतें छोड़नी होंगी। इसके लिए आपको ध्यानपूर्वक विचार और निरंतर प्रयास करके अपने सोचने का तरीका बदलना होगा। हालाँकि जितनी जल्दी आप अपनी आदतें बदलेंगे, उतनी ही जल्दी अपनी गलतियाँ दोहराने से बचने लगेंगे।
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