आम तौर पर जब लोग अपेक्षित व्यवहार नहीं करते, तो हम निराश हो जाते हैं। कितनी बार हम गुस्से से उबलने लगते हैं, जब लोग हमारी अपेक्षानुसार व्यवहार नहीं करते?
हम जानते हैं कि हम में से हर एक अनोखा और विशिष्ट है, फिर भी हम अपने जीवन साथी, अपने बच्चों और अपने कर्मचारियों को बिल्कुल अपनी तरह बनाने की कोशिश करते हैं और जब वे हमारा अनुसरण नहीं करते तो हम निराश हो जाते हैं। हम भूल जाते हैं कि यदि उन्हें बिल्कुल हमारी तरह ही होना होता तो ईश्वर ने हमारी फोटोकॉपियाँ बना दी होतीं (जो कि ईश्वर के लिए भी आसान होता); लेकिन चूँकि ईश्वर ने ऐसा नहीं किया है, तो इसके पीछे अवश्य कोई तर्क रहा होगा। इसलिए हमें ईश्वर के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
यदि हम सब एक जैसा सोचते और हमारी पसंद-नापसंद एक समान होती तो ये दुनिया इतनी खूबसूरत न होती । कल्पना करें कि हम सब को सिर्फ एक पीला रंग ही पसंद होता या सबका पसंदीदा पकवान एक ही होता। वह विविधता जो दुनिया को इतना रंगीन और दिलचस्प बनाती है, नजर नहीं आती। इसलिए अपने आस-पास के सब लोगों को अपने जैसा बनाने का विचार छोड़ दें। चलिए लोगों को बिल्कुल उसी रूप में स्वीकार करें, जैसे वे हैं; क्योंकि वही जीवन जीने कासर्वश्रेष्ठ तरीका है। हम सब की कुछ ताकतें और कुछ कमजोरियाँ हैं । अपने साथी की ताकतों को पहचानें । उनमें से 99 प्रतिशत आपकी कमजोरियाँ हो सकती हैं, इसलिए दोनों की ताकतों को जोड़े और जीवन का सामना एक टीम की तरह करें।
तो जब आप अगली बार सोचें कि यदि आप यहाँ दूसरों का भला करने के लिए हैं, तो दूसरे किसलिए हैं, और हर समय सिर्फ आपसे बदलने की अपेक्षा क्यों की जाती है, किसी और से क्यों नहीं।
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