क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप देश के बाहर छुट्टियों पर गए हों और आपको बिल्कुल अपने जैसा कोई दिखा हो - बिल्कुल आपके जैसा दिखनेवाला आपके सामने खड़ा हुआ? संभावना यही है कि आपने नहीं देखा। ऐसा इसलिए, क्योंकि हममें से हर एक मनुष्य अनोखा है। हम दुःखी और निराश तभी महसूस करते हैं, जब हम भूल जाते हैं या मानना छोड़ देते हैं कि हम कितने विशिष्ट और अनोखे हैं।
अपना महत्त्व जान लें तो आपको कभी चोट नहीं पहुँचेगी। आप बेशकीमती हैं। अपने मन में ये बात अवश्य रखें आपकी अनुमति के बिना कोई न आपका अपमान कर सकता है, न आपको कम आँक सकता है। हर चीज को एक सुखद और सफल जीवन जीने के लिए प्रतिक्रिया के रूप में देखें।
हारे हुए लोग उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जो उनके पास नहीं हैं या फिर उन सब चीजों पर जो उनके जीवन में गलत हो रही हैं। आप जैसे हैं, खुद को उसी रूप में प्यार करें। आपके पास जो कुछ है उसका भरपूर लाभ उठाएँ, और जो भी करें, उसे अपना शत प्रतिशत दें।
सबसे खराब स्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ देना ही चैंपियन होने की असली निशानी है। इसलिए समस्या के बारे में सोचें नहीं; क्योंकि समस्या के बारे में सोचना उसकी गंभीरता को बढ़ा देगा, जबकि समाधान के बारे में सोचना समाधानों की संख्या बढ़ाएगा। आपके सोचने का तरीका आपको विजेता या हारा हुआ बनाता है। चुनाव आपको करना है।
क्या आप जानते हैं कि महान् हिंदी कवि सूरदास नेत्रहीन थे और दुनिया कभी देखी न होने के बावजूद वे इतनी अच्छी वाग्मिता के साथ उसका वर्णन कर सकते थे!
सर्वश्रेष्ठ पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत में से कुछ की रचना बीथोवेन ने की थी, जो बहरे थे, और प्रकृति पर कुछ बेहतरीन कविताओं की रचना मिल्टन ने की थीं, जो नेत्रहीन थे।
हम सब के पास वह करने की शक्ति भी है, जो उन्होंने किया और अद्वितीय क्षमताएँ भी हैं; लेकिन हम अपनी प्रतिभाओं को खिलने की अनुमति नहीं देते और अपना अधिकांश समय अपने बारे में दूसरों की राय सुनने में बरबाद कर देते हैं।
'हर एक व्यक्ति प्रतिभाशाली है। लेकिन यदि आप एक मछली को उसके पेड़ पर चढ़ने की योग्यता से आँकेंगे, तो वह अपना पूरा जीवन ये मानते हुए बिता देगी कि वह मूर्ख है । - अल्बर्ट आइंस्टाइन
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें