कितनी हास्यास्पद बात है कि हममें से अधिकांश लोग ये मानते हैं कि यदि हम किसी को माफ नहीं करेंगे तो उन्हें कष्ट होगा; जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है...यदि हम किसी को माफ नहीं करते, तो कष्ट हमें होता है।
किसी के आपके साथ बुरा करने पर उसे माफ न करना आपको दुःख के एक लंबे रास्ते पर ले जाएगा और उस पूरी यात्रा में आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपके दिमाग में कितने नकारात्मक विचार घूम रहे हैं, और आपको कमजोर, उलझा हुआ एवं निराश बनाते जा रहे हैं। जब हम किसी को माफ नहीं करते, तो हम उनके जैसे बनने लगते हैं। जितनी अधिक नफरत हम उनसे करते हैं, उतना ही अधिक हम उनके जैसे बनते जाते हैं। हमें पता भी नहीं चलता कि कब हम खुद को एक क्षुब्ध, असभ्य और हृदयहीन व्यक्ति के रूप में बदल लेते हैं।
"हम जैसा सोचते हैं, वैसे ही बन जाते हैं।"
क्या आपने ध्यान दिया है कि जब आप किसी पर गुस्सा होते हैं तो लाल होने लगते हैं और आपके शरीर का तापमान बढ़ जाता है? ऐसी स्थिति में नफरत शरीर की प्रत्येक कोशिका में प्रवेश कर लेती है और बीमारी के पनपने व फैलने के लिए आदर्श वातावरण बना देती है। इसीलिए क्षमाशीलता का अभाव बीमारी के सबसे बड़े कारणों में से एक है। एक कड़वा मन देर-सबेर, जो कि कड़वाहट की सीमा पर निर्भर करता है - शरीर को कड़वा बना ही देता है।
मान लेते हैं आपका मित्र आपको धोखा दे रहा था अथवा आपके बॉस ने आपका अपमान किया। आप कहते हैं कि आप उनसे नफरत करते हैं और उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। इसमें किसका नुकसान होता है? निस्संदेह आपका !
वे आप हैं, जो रात को देर तक जागते हुए उनके बारे में कड़वी बातें सोचते रहेंगे और यदि आप उन्हें ज्यादा ही नफरत करते हैं तो वे आपके बुरे सपनों में भी आएँगे।
मनुष्यों के रूप में, गलतियाँ करना हमारे लिए पूर्णतः स्वाभाविक है। लेकिन आज, कितने बच्चे अपने माता-पिता को माफ करने के लिए तैयार हैं? कितने बॉयफ्रेंड्स अपनी पूर्व गर्लफ्रेंड्स की दी हुई चोटों को भुलाने के लिए तैयार हैं? कितनी पत्नियाँ अपने पतियों की पुरानी गलतियों को अभी तक दिल में लेकर बैठी हैं?
माफ करना सबसे मुश्किल काम हो सकता है; लेकिन हमें माफ करना होगा, अपने भले के लिए।
किसी को माफ करने के लिए आपको उससे पूरी तरह सहमत होने की आवश्यकता नहीं है, जो उसने आपके साथ किया; न ही आपको ये स्वीकार करने की आवश्यकता है कि उसने जो किया वह नैतिकता कीदृष्टि से सही है। आपको सिर्फ उसे भूल कर जाने देना है, क्योंकि जीवन में कुछ चीजों से छुटकारा पाना आपकी भलाई के लिए ही होता है। माफ न करने का अर्थ होता है - अपने दुःख के लिए किसी को दोष देना, और कौन कहता है किसी को दोष देना आपको कहीं नहीं ले जाता! ये निश्चित रूप से आपको अस्पताल ले जाता है। चिंता, तनाव, अल्सर, उच्च रक्तचाप और पेट में मरोड़ से वह व्यक्ति ग्रस्त नहीं होगा, जिसे आपने माफ नहीं किया है; बल्कि यदि आप भूलेंगे नहीं और माफ नहीं करेंगे तो वह आप होंगे, जो इनमें से एक या अधिक समस्याओं की चपेट में आ जाएँगे।
• सर्दियों में क्या हमारे लिए अच्छा होगा, यदि हम स्वेटर न पहनें और ठंडे मौसम को दोष दें?
• क्या गंदी सड़कों के बारे में शिकायत करने से कोई फायदा होगा, यदि हम जूते पहनकर बाहर जाने के बजाय नंगे पाँव ही बाहर निकल जाएँ?
यदि नहीं, तो किसी को अपनी भावनात्मक चोटों के लिए दोष देने से कैसे फायदा हो सकता है?
दोष देने से कभी किसी का फायदा नहीं हुआ है। फायदा होता है अपने जीवन को बदलने की 100 प्रतिशत जिम्मेदारी लेने से। और आपके बदलना शुरू करने पर जो चमत्कार होने लगते हैं, वे आपको विस्मित कर देंगे । आपके आस-पास के लोग बदल जाएँगे। ये सार्वभौमिक कानून है। जब आप उनसे अलग तरह का व्यवहार करने लगेंगे तो वे भी अलग तरह से प्रतिक्रिया व्यक्त करेंगे। जब आप पहले जैसे नहीं रहे तो वे कैसे रह सकते हैं?
'अपने जीवन के प्रति जिम्मेदारी को स्वीकार करें। ये जान लें कि आप खुद ही अपने को वहाँ ले जा सकते हैं, जहाँ आप जाना चाहते हैं - और कोई नहीं । '
-लेस ब्राउन
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