लेकिन माफ करना इतना मुश्किल क्यों होता है?
उस समय दुःखी होना मानव प्रवृत्ति है, जब हम किसी को कुछ देते हैं और बदले में हमें कुछ नहीं मिलता। वह पैसा, प्यार, देखभाल, सहायता, सलाह, आभार, प्रशंसा या सिर्फ एक मुस्कान - कुछ भी हो सकता है। हम दुःखी होते हैं, क्योंकि हमें लगता है कि हमारे साथ धोखा हुआ है या हमारा नुकसान हुआ है। लेकिन सत्य तो यह है कि हम और किसी चीज से नहीं, बल्कि सिर्फ ऊर्जा से बने हैं।
आपका प्यार ऊर्जा है, आपकी देखभाल ऊर्जा है, और आपकी नफरत भी ऊर्जा है। जब आप किसी को प्यार की ऊर्जा देते हैं तो उसे आपके पास गुना हो कर लौटना होता है-या तो उसी व्यक्ति के पास से या किसी और से। यह एक सार्वभौमिक नियम है कि जो ऊर्जा आप उत्सर्जित करते हैं, वह कई गुना बढ़कर आपके पास आ जाएगी - यदि आज नहीं, तो शायद एक साल बाद। लेकिन वह निश्चित रूप से आपके पास लौट कर आएगी।
हम प्रेम भरी बाल्टियाँ नहीं हैं, जो समय के साथ खाली हो जाएँगी; बल्कि हम प्रेम के महासागर हैं, असीमित । इसलिए चाहे हमारे जीवन में कुछ भी हुआ हो, हमारे पास हमारा प्यार, खुशी, हँसी, या काम से काम एक मुसकराहट साझा करने का विकल्प तो होता ही है। आप देखेंगे कि जितना अधिक आप बाँटते हैं, उतना बेहतर महसूस करते हैं।
आज से ही दूसरों को देना शुरू कर दें, जो आप अपने जीवन में वापस चाहते हैं। लोगों को उस तरह प्यार करें, जिस तरह आप खुद प्यार पाना चाहते हैं। उन चीजों के बारे में चिंता न करें जो आप जीवन में खो चुकेहैं या भविष्य में खो सकते हैं। अंत में, आपके पास न कुछ घटता है और न बढ़ता है, क्योंकि आपका खाता ब्रह्मांड द्वारा प्रबंधित होता है और लाख रुपए का तथ्य ये है कि ब्रह्मांड कभी गलत नहीं हो सकता। वह कभी छुट्टी पर नहीं जाता, इसलिए जितनी बार आप ऊर्जा बाहर देंगे, आपका खाता अपडेट कर दिया जाएगा।
जीवन के जोड़-घटाव समझने के बाद क्या माफी एक आसान काम रह जाती है? बिल्कुल नहीं; लेकिन आपको समझना चाहिए कि आप माफ किसी और के भले के लिए नहीं बल्कि खुद के भले के लिए करते हैं।
'अक्षमाशीलता वह जहर है, जो आप हर रोज इस उम्मीद के साथ पीते हैं कि दूसरा व्यक्ति मर जाएगा।'
- डेबी फोर्ड
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