मंगलवार, 24 सितंबर 2024

(56-60) झूठ भले दम दार हो, सिंहासन आसीन ।

56.झूठ भले दम दार हो, 

सिंहासन आसीन । 

सत्य नहीं कमजोर है, 

दिखें कैद में दीन।। 

सत्य कष्टों में बीते, 

झूठ, तब भी ना जीते।। 


57.सिंहासन बैठा असत्, 

पाता है धिक्कार। 

किन्तु हमेशा सत्य की, 

है अन्तिम जयकार ।।

असत् को ही है झुकना, 

सत्य ईश्वर की रचना ।। 


58.जो करते संसार में, 

स्थिति निज अनुकूल। 

स्वतः सुधर जाती यहाँ, 

उनकी सारी भूल ।। 

कि निज सामर्थ्य बढ़ाऐं, 

दोष से मुक्ती पाऐं।। 


59.शान्ति सरल सुखदायिनी 

औषधि है मुस्कान। 

अगर अधिक हो जाय तो, 

ना करती नुकसान।। 

सदा निश्च्छल मुसकाऐं, 

फरिश्ते भी अपनाऐं ।। 


60.अन्यायी दोषी बड़ा, 

कभी न वो सुख पाय । 

उससे भी ज्यादा गलत, 

है सहना अन्याय।। 

ढील यदि दोषी पाता, 

दो गुना पाप कमाता ।। 

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