है न अनोखी बात ।
सहसा देती चित्त को,
चिन्तन का आघात ।।
हृदय की चूल हिलाए,
वहीं सद् उक्ति कहाए । ।
77.रखें सहज सन्तुष्टि तो,
यह सच्ची समृद्धि।
आवश्यकता मुक्त हो,
स्वयं सिद्ध हो वृद्धि ।।
हृदय सन्तोष जगाऐं,
सहज संवर्धन पाऐं।।
78.निज जीवन में हम करें,
जो भी खर्च फिजूल ।
मन माने उसको उचित,
सहज न माने भूल ।।
खर्च पर रोक लगायें,
जिन्दगी सुखी बनाऐं।।
79.समय गुजरता जा रहा,
गुजर रहे संयोग।
समय न बीता है कभी,
बीत रहे हम लोग । ।
वक्त चलता है आगे,
मनुज बस पीछे भागे।।
80.समय सत्य का रूप है,
समय अचल व्यवहार ।
समय सदा रहता नहीं,
बदल रहा संसार ।।
वक्त तो नहीं बदलता,
कर्म के पीछे चलता ।।
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