मंगलवार, 17 सितंबर 2024

जै जै जै हनुमान गुसाईं,कृपा करहु गुरुदेव की नाई।।

जै जै जै हनुमान गुसाई।
शरणागत ने सद्गति पाई।।

अंजनिनन्दन दयानाथ कपिवर बजरंगी। रामदूत हनुमन्त तुम्हें भाएं सत्संगी॥

गर्व हरो हरि वायुपुत्र मैनाक विजेता।
जगपावन श्रीरामचरित के प्रथम प्रणेता।

निज भक्तोंकी दोष दशा पल में अपनाई। कृपाकरो सेवक पर हे हनुमान गुसाई ।।

दीनबन्धु तुम परमचतुर और दृढ़ विश्वासी रामकृपा राघव दरशन के हो अभिलाषी। 

अनुज भीम का गर्व अपने पल में तोड़ा। पार्थ बली का अहं दैन्य के पथ पर मोड़ा 

शक्ति पुंज रुद्रावतार तुम शिव के प्यारे । लखन भरतसे बढ़कर हो तुम रामदुलारे। 

दीन हीन तुलसीको जब तुमने अपनाया। रामचरित सुर दुर्लभ राम कृपा से गाया।। 
हे बलधाम ब्रह्मचारी रघुनाथ पियारे ।
सदा रहो कपिराज डटे तुम राम दुआरे।।

रिद्धि सिद्धि बढ़ कर राम नाम सुखदाई।
 सदा कृपामय जय जयहे हनुमान गुसाई। 
कृपा करहु गुरुदेव को नाई ॥ 
पाप हरो प्रभु जन सुखदाई।।

गुरुवर की हो कृपा जीवके संकट कटते। चिन्ता शोक द्वेष पीड़ा पलभर में हरते।।

अगर न हो गुरुकृपा ज्ञान सब रहेअधूरा। तीनलोक का तत्व चरणरज पाकर पूरा।।

भुवनचतुर्दश दिव्य आपकी कीरति छाई। कृपाकरो स्वामी हमपर गुरुदेव की नाई।। 
सद्‌गुरु हरि की चरण धूलि तक हैं पहुँचाते। 
इधर-उधर भटके जीवोंको मार्ग दिखाते।। 
हरि गुरु हैं समरूप भेद उनमें नहिंकोई। शुष्क हृदयमें बेल भक्तिकरुणा की बोई।। 
हनुमत करते कृपा सदा गुरुदेव समाना। धन्यहुआ जिसने मारुतिको ही गुरु माना 

सद्‌गुरु हैं हनुमान नावको करें किनारे। नाम मात्र से पाप ताप भय कटें हमारे।।

एक बार हनुमान नाम जो प्राणी गाये। सर्वशक्ति गुणभक्ति मिले जोतुमको ध्याये

हरिसेवक हर कार्य आप करते हर्षाई बजरंग  कृपा करो हम पर गुरुदेव की नाई।। 



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