1. अपने कार्यों का विश्लेषण और मूल्यांकन करें। सोचें, कि आप वे सारे काम क्यों कर रहे हैं, जो आप करते हैं, विशेष रूप से वे जिन्हें करने की आपको आदत है। आपके जीवन पर उनका क्या प्रभाव है, और क्या उन्हें करने का कोई कारण भी है ? किसी काम को करने के विभिन्न तरीकों के बारे में सोचना आपको और सक्रिय बना सकता है और इस बात की संभावना हमेशा रहती है कि कोई चीज, जो आपकी आदत बन गई है, वास्तव में आपकी जीवन-शैली को कोई लाभ नहीं पहुँचा रही है। यदि ऐसी बात है तो क्यों न उसे बदल दिया जाए और विभिन्न गतिविधियाँ या काम करने के विभिन्न तरीके आजमाए जाएँ।
2. अलग रास्तों की तलाश करें, जहाँ नियंत्रण छोड़ देना आसान हो।
सबके जीवन में कुछ ऐसे पहलू होते हैं, जहाँ वे अन्य लोगों से अधिक नम्र होते हैं। अपनी मानसिक कट्टरता को सुधारने की शुरुआत करते समय, ऐसे क्षेत्रों की तलाश करें, जहाँ आपके लिए नियंत्रण रखने से ज्यादा आसान आराम से बैठकर सबकुछ देखना हो। ये अपने कार्यों में कुछ अधिक लचीले होकर लाभ प्राप्त करने का अच्छा तरीका है और अंत में आप उन क्षेत्रों में अपने नियंत्रण का परित्याग करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं, जहाँ कार्य करना आपके लिए ज्यादा मुश्किल है।
3. अपने ध्यान के केंद्र को बदलें
बदलती स्थिति के साथ अपने ध्यान के केंद्र को बनाए रखने या बदलने की क्षमता एक और महत्त्वपूर्ण कौशल है, जो अनुकूलन क्षमता और नम्रता के उच्च स्तर की ओर संकेत करता है। जो लोग किसी चीज पर निरंतर ध्यान बनाए रखते हैं, जो मानसिक रूप से परेशान करनेवाला काम है, वे उसके साथ लंबे समय तक सहज नहीं रहनेवाले। इसलिए किसी ऐसी चीज पर ध्यान केंद्रित करें, जो आपके ध्यान को परेशानी से निकाल कर खुशी की ओर ले जाए।
4. स्वयं को पूर्णता के बजाय विनम्रता के लिए पुरस्कृत करें
जब आपको लगे कि आप ऐसी स्थिति में भी सहज और सरल रहे हैं, जो आम तौर पर आपके लिए मुश्किल होती है, तो खुद को कोई ऐसा पुरस्कार दें, जिसमें आपको आनंद आता हो। जीवन भर, जब हम पूर्णता प्राप्त करते हैं तो हमें प्रशंसा या पहचान के भौतिक पुरस्कार द्वारा पुरस्कृत किया जाता है। ये एक ऐसी मानसिकता को जन्म दे सकता है, जोपूर्णता से कम किसी चीज के लिएतैयार नहीं होती। खुद को किसी चीज से पूर्णता के बजाय अपनी विनम्रता के साथ निपटने के लिए पुरस्कृत करके आप इस विचार को पुनर्स्थापित कर सकते हैं कि सिर्फ पूर्णता ही पुरस्कार पाने योग्य होती है।
5. अपनी गलतियों से सीखें
जब काम बिगड़ जाए, तो ये देखना महत्त्वपूर्ण है कि ऐसा क्यों हुआ और ऐसी घटनाओं से बचने के लिए या भविष्य में बेहतर परिणाम पाने के लिए क्या किया जा सकता है। जो लोग किसी आदत की वजह से या खुद को बदलने में सक्षम न होने के कारण नकारात्मक परिणामों की परवाह किए बिना वही काम करना जारी रखते हैं, उनके जीवन में अधिक प्रभावी होने की संभावना नहीं होती और वे उन्हीं गलतियों के कारण निरंतर कष्ट उठा सकते हैं, और इन सब के कारण उनके मानसिक स्वास्थ्य में कमी आ सकती है।
6. दूसरों के दृष्टिकोण से भी चीजों को देखें।
स्वयं को दूसरों के विचारों और मानसिकताओं के प्रति खुला रखकर आप अपने सोचने के तरीके को पूरी तरह बदल सकते हैं और अपने काम में और जीवन में नई और रोमांचक चीजों का अनुभव कर सकते हैं। भले ही किसी विशेष दृष्टिकोण के प्रति अपनी पहली प्रतिक्रिया में आप उससे सहमत न हों, लेकिन अपनी राय व्यक्त करने से पहले उसके बारे में सोचें और इस संभावना के लिए खुद को खोलें कि इस दूसरे दृष्टिकोण से भी आपको कोई लाभ हो सकता है।
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