गुरुवार, 10 अक्टूबर 2024

(16)माता-पिता प्रत्यक्ष देवदूत हैं

आपके माता-पिता ने आपको अपना एक अंश उस पहली कोशिका के माध्यम से ही दे दिया था, जिससे आपका जन्म हुआ। उन्होंने अपने जीवन को प्रबंधित करने के अलावा आपकी परवरिश को भी अपनी ऊर्जा, अपना समय, अपने पैसे और प्रयास दिए. उन्होंने आपको सही भोजन और शिक्षा प्रदान की। सबसे महत्त्वपूर्ण आपके खुद पर विश्वास करना सीखने के पहले आपके माता-पिता ने आप में विश्वास किया। जब आप घुटनों पर चलना सीख रहे थे, उन्होंने आपको थाम कर चलना सिखाया। उन्होंने इस धरती पर आपके पहले दिन से और उस समय से, जब आपके लिए सबकुछ अनजाना था, आपका समर्थन किया।

फिर भी, कुछ बच्चों को अपने माता-पिता और अपने बीच एक मजबूत एवं खुशी भरा बंधन बनाए रखने में कठिनाई होती है। हर गुजरते दिन के साथ संवादहीनता बढ़ती जाती है और माता-पिता व बच्चों के बीच और अधिक समस्याएँ पैदा होने लगती हैं। लेकिन माता-पिता और बच्चों के बीच के संबंधों में सुधार लाने का एक नुस्खा है और वह बहुत आसान है।और ये नुस्खा है 

'थैंक यू' या 'शुक्रिया' कहना ।

एक अध्ययन से पता चला है कि ये दो जादुई शब्द ही हैं, जिन्हें अपने बच्चों से सुनने की माता-पिता सबसे ज्यादा अपेक्षा करते हैं। फिर भी, क्या हमें याद भी है कि पिछली बार हमने अपने माता-पिता को 'थैंक यू' या 'शुक्रिया' कब कहा था?

मनोवैज्ञानिक विलियम जोंस ने कहा था कि मनुष्य की सबसे गहरी इच्छाओं में से एक होती है- सराहे जाने की इच्छा वास्तव में,ईमानदारी से की गई सराहना उन सर्वोत्तम उपहारों में से एक है, जो हम अपने आस-पास किसी को दे सकते हैं; क्योंकि हमारे अंदर भी गहराई में भी सबसे बड़ी इच्छा होती है-जीवन में प्रशंसा पाना। अपने दिल की गहराई में हम सब गुप्त रूप से प्रशंसा पाने की लालसा रखते हैं। लेकिन प्रशंसा के सबसे अधिक योग्य होते हैं हमारे माता-पिता ।

क्या उन्होंने ये सब अपना काम समझ कर किया? नहीं। उन्होंने स्वेच्छा से अपने आराम का त्याग किया और आपके ऊपर अपना ध्यान व ऊर्जा न्योछावर किए - सिर्फ प्यार और परवाह के कारण। उनके लिए आपकी हर जरूरत को पूरा करना अनिवार्य नहीं था, लेकिन फिर भी उन्होंने किया।

लेकिन उन्हें शुक्रिया कहने के बजाय हम उनमें खामियाँ ढूँढ़ते रहते हैं। हम सबके स्वभाव में खामियाँ होती हैं और जब हम में से कोई भी त्रुटिहीन नहीं है, तो हम अपने माता-पिता के त्रुटिहीन होने की उम्मीद क्यों करते हैं? कोई भी माता-पिता जान-बूझकर अपने या अपने बच्चों के जीवन में परेशानियाँ लाने में खुशी महसूस नहीं करते। बात सिर्फ इतनी है कि उन्हें जीवन जीने का बस यही एक तरीका आता है, शायद इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने बढ़ने के दौरान यही तरीका सीखा था । उन्होंने बच्चों की परवरिश करने में कोई पी-एच. डी. की डिग्री नहीं अर्जित की थी। उन्होंने परवरिश करने का अपना तरीका ढूँढ़ा था- अपने खुद के जीवन के वित्तीय और सामाजिक मुद्दों के साथ संतुलन बनाते हुए ।

इसलिए, आप कम-से-कम उनके लिए इतना तो कर ही सकते हैं कि उनके प्रति आभार व्यक्त करें और अपने जीवन की पूरी जिम्मेदारी खुदउठाएँ। न किसी के ऊपर आपकी जीविका निर्भर है और न आपकी खुशी निर्भर है। वह सिर्फ आप हैं, जिसे खुद के लिए काम करने की आवश्यकता है।

'हर कोई पृथ्वी को बचाना चाहता है। कोई भी माँ को बरतन साफ करने में मदद नहीं करना चाहता । '

- पी. जे. ओरॉर्क

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