शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024

(17) क्या जीवन साथी वास्तव में स्वर्ग में बनते हैं?

सही सोच से आजादी मिलती है, जबकि गलत सोच गुरुत्वाकर्षण जैसा काम करती है और जीवन में आपको धराशायी करती है !!

बचपन से ही, हमें फिल्मों और प्रेम कहानियों से रोमांस का ये नुस्खा मिलता है कि एक दिन एक लंबा व सुगठित युवक या एक गोरी व सुंदर लड़की हमारे जीवन में प्रवेश करेगी, सबकुछ ठीक कर देगा/देगी और हमारे जीवन को काल कोठरी से स्वर्ग के रूप में बदल देगा / देगी। हमें बेहिसाब खुशी मिलेगी और हमारे सारे सपने सच हो जाएँगे ।

लगभग हर फिल्म जो हम देखते हैं और गाने जो हम सुनते हैं, एक ही संदेश संप्रेषित करते हैं और वह संदेश है- 'तुमसे मिलने के पहले मैं दुःखी और हारा हुआ था / थी; लेकिन तुमने मेरे जीवन को परियों की कहानी जैसा बना दिया।'

लेकिन वास्तविक जीवन में बात कुछ ऐसी होती है - 'तुमसे मिलने के पहले मैं दुःखी था/थी, लेकिन तुमने मेरा जीवन निराशाजनक बना दिया है। मैं बरबाद हो गया / गई हूँ।' क्या आपने कभी सोचा है कि

वास्तविक जीवन में दुनिया की अधिकांश जोड़ियों के साथ ऐसा क्यों होता है?

यहाँ, एक बार फिर आकर्षण का नियम काम करता है। खुश लड़के खुश लड़कियों को आकर्षित करते हैं और दुःखी लड़के दुःखी लड़कियों को। और उन्हें जीवन भर एक साथ दुःख और परेशानियाँ साझा करनी पड़ती हैं।

एक खुश लड़की हमेशा एक दुःखी लड़के से दूर रहेगी, जो अपने जीवन से नाखुश है। वह उससे प्लेग की तरह बचती रहेगी । और ऐसे दुःखी लड़के कभी किसी खुश लड़की की राडार स्क्रीन पर नजर नहीं आएँगे।

आकर्षण के कानून - सार्वभौमिक नियम - ने हमें हमेशा बताया है कि यदि आप दुःख व दर्द का कचरा जमा करेंगे, तो सिर्फ मक्खियाँ ही पास आएँगी।

प्रस्तुत है आदर्श जीवन साथी पाने का एक असल जीवन का नुस्खा |

इस बात का इंतजार न करें कि आपका जीवन साथी आसमान से उतरेगा और आपकी सारी परेशानियाँ दूर कर देगा; बल्कि परेशानियों का हल खुद ढूँढ़ें या कम-से-कम चेहरे पर एक मुस्कान रखें और इस वर्तमान पल में खुश रहते हुए एक सकारात्मक आवृत्ति उत्सर्जित करें। और तब आप निश्चित रूप से एक आदर्श जीवन साथी को आकर्षित करेंगे, जिसके साथ आप जीवन भर एक अंतरंग संबंध साझा कर सकेंगे।

इसलिए, पहले खुद को प्यार करें। यदि आप खुद को प्यार नहीं कर सकते, कम-से-कम खुद को पसंद करें। जीवन के उजले पक्ष को देखते हुए जीवन के प्रति अच्छा महसूस करें। जीवन इसी तरह दिन-पर-दिन बेहतर होता चला जाएगा।

यदि आप ध्यान से चारों ओर देखेंगे, तो आपको पता चलेगा कि प्रसन्न जोडियाँ साथ आने के पहले व्यक्तिगत रूप से प्रसन्न थीं। फिल्मों में, जब जोड़ियाँ साथ आ जाती हैं, तो कहानी समाप्त हो जाती है; लेकिन वास्तविक जीवन में, वह कहानी की शुरुआत होतीहै। इसलिए, जब आपको आपका जीवन साथी मिल जाता है, तो आप जीवन भर खुशी के साथ कैसे रह सकते हैं?

ये कुछ तरीके हैं, जिनकी मदद से आप अपने जीवन साथी के साथ एक मजबूत व अंतरंग संबंध साझा कर सकते हैं-

सबसे पहले आपको ये पता होना चाहिए कि एक अंतरंग संबंध में होने का मतलब होता है-अपने साथी का सबसे अच्छा दोस्त होना । उनका विश्वास जीतें, ताकि वे अपने मन की हर बात आपसे कह सकें और अपने जीवन के किसी भी पहलू के बारे में खुल कर आपसे बात करने में और अपने सब राज साझा करने में सहज महसूस करें।

अपने साथी की दिलचस्पियों में दिलचस्पी पैदा करें। यदि आपके साथी को टेनिस खेलना अच्छा लगता है तो खेल में उनके साथ शामिल हो जाएँ, या कम-से-कम एक समर्थक के रूप में उनके साथ जाकर उनका हौसला बढ़ाएँ। जल्दी ही आप देखेंगे कि आपका साथी भी आपकी दिलचस्पियों में शामिल हो गया है।

तीन महत्त्वपूर्ण शब्द कहना हमेशा सुनिश्चित करें - 'आई लव यू' नहीं, जैसा कि आपने अनुमान लगाया होगा, बल्कि 'आई एम सॉरी' । एक रिश्ते में दोनों ओर के लोगों को इन तीन शब्दों का महत्त्व समझना चाहिए, जिनमें आपको उस तनाव से मुक्त करने की शक्ति होती है, जो आपके बीच की लड़ाई का परिणाम हो सकता है। गलती चाहे किसी की भी हो, 'मुझे माफ कर दो' कहने से वह तनाव दूर हो सकता है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में आप दोनों के बीच उत्पन्न हो सकता है।

जब एक अंतरंग संबंध में दोनों साथी एक-दूसरे का समर्थन, सम्मान और सराहना करते हैं, तो प्यार, खुशी, उत्साह, जोश और संतुष्टि जैसी सभी सकारात्मक भावनाएँ हमेशा के लिए जीवन में आ जाती हैं, जिससे दोनों साथी अपने सबसे रचनात्मक रूप को प्राप्त कर लेते हैं।

इस प्रकार साथ में, दोनों साथी एक सुरीला परिवार का निर्माण करते हैं, बुद्धिमान और संवेदनशील बच्चों को जन्म देते हैं, एक संपन्न व्यवसाय की रचना करते हैं, मित्रवत् पड़ोसी और अंततः एक स्वस्थ समाज तैयार करते हैं।

'प्यार एक दोस्ती है, जिसने आग पकड़ ली है। यह एक शांत समझ, आपसी विश्वास, बाँटना और माफ करना है। ये अच्छे और बुरे समय में वफादारी है । ये पूर्ण से कम को स्वीकार करता है और मानवीय कमजोरियों को छूट देता है।'

- ऐन लैंडर्स

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