जब हम स्कूल में थे तो हम अपनी रचनात्मकता का अधिकतम उपयोग करते थे। परीक्षाओं में हम उन प्रश्नों के उत्तर लिखने में भी कई पन्ने भर देते थे, जो हमने अपनी कक्षा में कभी सुने भी नहीं थे। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हम अपने आपको कम करके आँकने लगते हैं और समस्याएँ सुलझाने की तथा मुद्दों का सामना करने की अपनी स्वाभाविक क्षमता को कम समझने लगते हैं।
यथार्थ में हर वह बाधा, जो हमारा रास्ता रोकती है, तोड़ी जाने के लिए बनी है; लेकिन कई बार वह हमें तोड़ देती है। इसी समय सोचें कि क्या जीवन में कोई ऐसी चीज है, जो आपको वह पाने से रोक रही है, जो आप चाहते हैं, क्या कोई ऐसी चीज है, जो आपकी सफलता, खुशी और मानसिक शांति की राह में रुकावट डाल रही है? क्या आप उस रुकावट के सामने खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं?
यदि हाँ, तो खुद को याद दिलाएँ कि आपके पास उसे तोड़कर आगे बढ़ने की भरपूर ताकत है। जिस प्रकार ऐसा कोई ताला नहीं है, जो एक विशेष चाभी से खोला न जा सके, उसी प्रकार धरती पर ऐसी कोई रुकावट नहीं है, जो तोड़ी न जा सके। हाँ, कभी-कभी उसे तोड़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन असंभव कभी नहीं ।
यदि हम अपने भीतर की आवाज को ध्यान से सुनें, तो वह चुपके से फुसफुसाती है - चलो, एक बार और कोशिश करें; क्यों न एक बारऔर यह करके देखें? क्योंकि अपने मन की गहराई से हम जानते हैं कि ये संभव है।और अधिकांश अवसरों पर, वह गुच्छे की अंतिम चाभी ही होती है जो ताले को खोलती है।
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