आम तौर पर, जब आप अपने साथी से मिलते हैं, तब भी आपका दिमाग निरंतर आपके व्यवहारिक कार्यों में ही फंसा रहता है और लाभ-हानि की गणना करता रहता है। एक ही समय पर आप भावनात्मक और मानसिक रूप से कई स्थानों के बीच बँटे रहते हैं। लेकिन ऐसे संबंधों में परिपूर्णता कहाँ होती है?
यह उचित नहीं है कि आप दिन भर में कुछ पल, विशेष रूप से उस व्यक्ति के लिए, समर्पित करने के लिए तैयार नहीं हैं, जिसके साथ आपने पूरा जीवन बिताने का निर्णय लिया है।
ये कुछ तरीके हैं, जिनसे आप अपने पारिवारिक प्रेम की ऊर्जा को निरंतर प्रवाहित रख सकते हैं-
•बात करते समय आँखों का संपर्क बनाए रखें। सामनेवाले द्वारा कुछ कहे जाने पर आंखों को दूसरे कार्य में व्यस्त न करें।
•पाँच मिनट के लिए ही सही, लेकिन दिलचस्पी के साथ अपने साथी की बात सुनें; इससे निश्चित रूप से फर्क पड़ता है। शारीरिक रूप से साथ रहने के अलावा, मानसिक रूप से भी वहाँ उपस्थित रहें।
'जहाँ प्रेम है, वहीं जीवन है। '
एक कॉरपोरेट सेमिनार में 300 लोग थे। वहां एक समूह गतिविधि आयोजित की गई ,जिसमें सबको गुब्बारे वितरित किए। मार्कर पेन का प्रयोग करके सदस्यों से एक एक गुब्बारों पर अपने अपने नाम लिखने के लिए कहा गया। फिर सब गुब्बारों को एकत्रित करके दूसरे कमरे में रख दिया गया। प्रतिभागियों को उस कमरे में बुलाकर 5 मिनट की समय सीमा के अंदर उनके नामवाले गुब्बारे ढूँढ़ने के लिए कहा गया। सबने अपने नामवाले गुब्बारे ढूँढ़ने शुरू कर दिए। समय कम था इसलिए वहाँ धक्का-मुक्की शुरू हो गई, लोग एक-दूसरे से टकराने लगे और कमरे में अराजकता फैल गई।
5 मिनट समाप्त होने तक कोई अपने नामवाला गुब्बारा नहीं ढूँढ़ पाया था। फिर प्रत्येक व्यक्ति से कहा गया कि वे कोई भी गुब्बारा उठा लें और जिसका नाम लिखा हो, उसे दे दें। दो मिनट के अंदर सबके हाथ में उनके नामवाले गुब्बारे थे। यह थी सहयोग की शक्ति!
हमारे जीवन में ऐसा नियमित रूप से होता है। हर कोई प्यार व खुशी चाहता है और उसे खोजने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। लेकिन सच्चाई ये है कि जब आप अपने आस-पास के लोगों को प्यार और खुशी देंगे तो आपको भी बदले में वही प्राप्त होगा ।
'प्रत्येक दिन अपने स्वयं के उपहार लेकर आता है। आपको बस, रिबन खोलने हैं।' - रुथ एन बेकर
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