96.कार्य सदा होता सफल
अगर योजना ठीक ।
जीत चाहते हो अगर,
रखना दृष्टि सटीक ।।
योजना उचित बनाऐं,
सफलता निश्चित पाऐं । ।
97.सद्ग्रन्थों का अध्ययन,
और नित्य स्वाध्याय ।
ज्ञान वृद्धि, मन रंजना ,
खर्च न कुछ भी आया।
ग्रंथ सुख के संवाहक,
बनाते हम को लायक ।।
98.किससे कब क्या-क्या कहा,
रखना पड़े न याद ।
अगर असत् को त्याग कर,
करें सत्य सम्वाद ।।
अगर सच को अपनाते,
झूठ में भटक न पाते ।।
99.अर्द्ध सत्य होता कुटिल,
लेता सब कुछ लूट।
या तो पूरा सत्य हो,
या फिर पूरा झूठ ।।
अगर सच रहे अधूरा,
भरोसा तोड़े पूरा ।।
100.आकुलता होती अधिक,
सहज प्राप्त ना होय।
पाते हम वह सहज ही,
जिस हित धीरज खोय।।
तमन्ना दिल से कीजै,
प्राप्ति भी निश्चित लीजै ।।
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