रविवार, 10 नवंबर 2024

(106-110) शिक्षा बन्धन मुक्ति का, युग परिवर्तक भाव।

106.शिक्षा बन्धन मुक्ति का, 

युग परिवर्तक भाव।

लोकतन्त्र में यह रखे, 

अपना पूर्ण प्रभाव ।। 

मुक्ति लाती है शिक्षा, 

करे जीवन की रक्षा ।। 


107.मन में हो नव भावना, 

तभी सृजन सम्पूर्ण । 

हरियाली जब छा रही, 

सूखे तृण हो चूर्ण ।। 

सृजन तो हर पल होता, 

सुधा का निकले सोता (स्त्रोत) ।। 


108.संकट सुलझ न पाय तो, 

रखो इसे अटकाय । 

समय टले चिन्तन जगे, 

कभी सुलझ भी जाय।। 

विपद् में मत घबराओ, 

न सुलझे तो लटकाओ।। 


109.मन की मन्द विमूढता, 

चाहे हरे न प्रान। 

किन्तु दिलाती वह सदा, 

असहनीय अपमान ।। 

झेलता मूढ़ अनादर, 

प्राण भय से बढ़कर डर ।। 


110.खून बहा देना, नहीं 

देश भक्ति का अर्थ । 

युवा अगर लाचार तो, 

सारी  शिक्षा व्यर्थ ।। 

साध लें अगली पीढ़ी, 

तरक्की की वह सीढ़ी ।। 

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