युग परिवर्तक भाव।
लोकतन्त्र में यह रखे,
अपना पूर्ण प्रभाव ।।
मुक्ति लाती है शिक्षा,
करे जीवन की रक्षा ।।
107.मन में हो नव भावना,
तभी सृजन सम्पूर्ण ।
हरियाली जब छा रही,
सूखे तृण हो चूर्ण ।।
सृजन तो हर पल होता,
सुधा का निकले सोता (स्त्रोत) ।।
108.संकट सुलझ न पाय तो,
रखो इसे अटकाय ।
समय टले चिन्तन जगे,
कभी सुलझ भी जाय।।
विपद् में मत घबराओ,
न सुलझे तो लटकाओ।।
109.मन की मन्द विमूढता,
चाहे हरे न प्रान।
किन्तु दिलाती वह सदा,
असहनीय अपमान ।।
झेलता मूढ़ अनादर,
प्राण भय से बढ़कर डर ।।
110.खून बहा देना, नहीं
देश भक्ति का अर्थ ।
युवा अगर लाचार तो,
सारी शिक्षा व्यर्थ ।।
साध लें अगली पीढ़ी,
तरक्की की वह सीढ़ी ।।
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