चित्त एक ही चाह ।
हम भावी सन्तान को,
दें प्रशस्त हर राह ।।
बढ़ें भावी संतानें ,
देश को अपना मानें।।
112.यादें यदि लगतीं सुखद,
करें विगत को याद ।
किन्तु न इनसे हो कहीं,
वर्तमान बरबाद ।।
याद करना अतीत को,
नियति के विगत गीत को ।।
113.सुनें अगर आलोचना,
करते प्रबल विरोध ।
मुफ्त वाह वाही जंचे,
कीजै इस पर शोध ।।
मिले झूठी शाबाशी,
कि जैसे मथुरा काशी ।।
114.कभी सहन मत कीजिये
कहीं कोई अन्याय ।
किन्तु सजग उससे रहें,
जो मुँह पर गुणगाय।।
गीत जो मुँह पर गाता।
पीठ पर छुरी चलाता।।
115.करते हम जो काम अब,
क्या इसका परिणाम ।
लग जाये अनुमान तो,
सहज सफल हर काम ।।
कर्म ही करते रहना,
न फल की इच्छा करना ।।
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