रविवार, 24 नवंबर 2024

(111-115)देश भक्ति सच्ची यही, चित्त एक ही चाह ।

111.देश भक्ति सच्ची यही, 

चित्त एक ही चाह । 

हम भावी सन्तान को, 

दें प्रशस्त हर राह ।। 

बढ़ें भावी संतानें , 

देश को अपना मानें।। 


112.यादें यदि लगतीं सुखद, 

करें विगत को याद । 

किन्तु न इनसे हो कहीं, 

वर्तमान बरबाद ।। 

याद करना अतीत को, 

नियति के विगत गीत को ।। 


113.सुनें अगर आलोचना, 

करते प्रबल विरोध । 

मुफ्त वाह वाही जंचे, 

कीजै इस पर शोध ।। 

मिले झूठी शाबाशी, 

कि जैसे मथुरा काशी ।।


114.कभी सहन मत कीजिये 

कहीं कोई अन्याय ।

किन्तु सजग उससे रहें, 

जो मुँह पर गुणगाय।। 

गीत जो मुँह पर गाता।

पीठ पर छुरी चलाता।। 


115.करते हम जो काम अब, 

क्या इसका परिणाम । 

लग जाये अनुमान तो, 

सहज सफल हर काम ।। 

कर्म ही करते रहना, 

न फल की इच्छा करना ।।

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