ईश्वर पर विश्वास ।
मुक्त रहे भय से हृदय,
मिले सत्य आभास ।।
कार्य ही पूजा पहली,
सत्य की ज्योति रुपहली ।।
117.दुष्ट अगर होता सबल,
खुद ही बने प्रहार ।
उसे डूबा देता सदा,
उसका आत्मा प्रचार ।।
दुष्टता उसे गिराती,
न वह ताकत बन पाती । ।
118.हम गैरों से चाहते,
है जैसा व्यवहार ।
उसे प्रशंसा मानिये,
या कहिये सत्कार ।।
प्रशंसा यदि तुम चाहो,
प्रथम व्यवहार निबाहो । ।
119.पतन पंथ पर आपकी,
भटक जाय जब राह ।
मित्र वही सच्चा कि जो,
करे तुम्हें आगाह ।।
तुम्हारी कमी बताए।
तुम्हें सद् राह दिखाये ।।
120.संकट कितना भी बड़ा,
हो अवरोध अनेक ।
समाधान के हित यहाँ,
अवसर मिलता एक ।।
उसे आगे बढ़ पकड़ो,
न छूटे ऐसा जकड़ो।।
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