रविवार, 8 दिसंबर 2024

(116 -120) कर्म शक्ति में आस्था, ईश्वर पर विश्वास ।

116.कर्म शक्ति में आस्था, 

ईश्वर पर विश्वास । 

मुक्त रहे भय से हृदय, 

मिले सत्य आभास ।। 

कार्य ही पूजा पहली, 

सत्य की ज्योति रुपहली ।। 


117.दुष्ट अगर होता सबल, 

खुद ही बने प्रहार । 

उसे डूबा देता सदा, 

उसका आत्मा प्रचार ।। 

दुष्टता उसे गिराती, 

न वह ताकत बन पाती । । 


118.हम गैरों से चाहते, 

है जैसा व्यवहार । 

उसे प्रशंसा मानिये, 

या कहिये सत्कार ।। 

प्रशंसा यदि तुम चाहो, 

प्रथम व्यवहार निबाहो । । 


119.पतन पंथ पर आपकी, 

भटक जाय जब राह । 

मित्र वही सच्चा कि जो, 

करे तुम्हें आगाह ।। 

तुम्हारी कमी बताए।

तुम्हें सद् राह दिखाये ।। 


120.संकट कितना भी बड़ा, 

हो अवरोध अनेक । 

समाधान के हित यहाँ, 

अवसर मिलता एक ।। 

उसे आगे बढ़ पकड़ो, 

न छूटे ऐसा जकड़ो।। 

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