देखते-देखते साल खत्म होने जा रहा है। नया साल मतलब नए संकल्प, नई ऊर्जा । नए साल में नए-नए संकल्प लेना इन्सान की आदत ही नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से अलग- अलग संस्कृतियों की परंपराओं का हिस्सा भी रहा है। नया साल, नया कैलेंडर भी लेकर आता है। सभी अपने लिए नए लक्ष्य भी निर्धारित करते हैं। नए साल में संकल्प लेना या वादे करना कोई नई बात नहीं है। लेकिन क्या आपको पता है कि नए साल पर नए संकल्प लेने की परंपरा हजारों साल पुरानी है। अधिकांश प्राचीन संस्कृतियों में नए साल की शुरुआत में किसी न किसी प्रकार की धार्मिक परंपरा या त्योहार का पालन किया जाता रहा है। साथ ही सभी संस्कृतियों के नए साल को मनाने का तौर-तरीका भी अलग-अलग था।
■ बेबीलोनवासियों का नया साल
ऐसा माना जाता है कि 4,000 साल से भी पहले बेबीलोन के लोग नए साल पर प्रतिज्ञाओं के रूप में नया संकल्प लेने वाले पहले इन्सान थे। इन्हीं प्रतिज्ञाओं को अब संकल्प के रूप में जाना जाता है। हालांकि, बेबीलोन के निवासी नया साल जनवरी में नहीं, बल्कि मार्च के मध्य में मनाते थे। यह फसलों की रोपाई का भी मौसम होता था। बेबीलोन के लोग नए साल में जो संकल्प लेते थे, वे धर्म, कथाओं, शक्ति और सामाजिक- आर्थिक मूल्यों से गहराई से जुड़े हुए होते थे। ऐसी मान्यताएं हैं कि बेबीलोन के लोगों ने 'अकीतु' नामक त्योहार की शुरुआत की थी। यह बारह दिनों तक चलने वाला त्योहार था। इसमें वे सड़कों पर अपने देवताओं की मूर्तियों की परेड निकालते थे, अराजकता पर विजय के प्रतीक के रूप में अनुष्ठान करते थे, फसलें उगाते थे और अपने राजा के प्रति वफादारी की प्रतिज्ञा करते थे। उनका मानना था कि इन वादों को पूरा करने से उन्हें आने वाले साल में अपने देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
■ प्राचीन रोम
प्राचीन रोम में, नए साल का जश्न मनाने और संकल्प लेने की बेबीलोनवासियों की परंपरा जारी रही। रोमन नववर्ष 15 मार्च को मनाया जाता था, जिसे 'मार्च की ईद' के रूप में जाना जाता था। इस दिन को इसलिए चुना गया, क्योंकि यह वह समय था, जब प्रमुख रोमन अधिकारी, जिन्हें कॉन्सल कहा जाता था, अपना कार्यकाल शुरू करते थे। रोम के लोग इस दिन नए साल और वसंत की देवी अन्ना पेरेन्ना का त्योहार भी मनाते थे।
■ जूलियन कैलेंडर
अब बात नया साल मनाने के लिए एक जनवरी की तारीख कब और कैसे चुनी गई? जूलियस सीजर नामक महान रोमन सम्राट ने 46 ईसा पूर्व में जूलियन कैलेंडर की शुरुआत की। इसी कैलेंडर में सबसे पहले एक जनवरी को नए साल की शुरुआत के रूप में घोषित किया गया था। यह तारीख शुरुआत और बदलाव के रोमन देवता, जेनस के सम्मान में चुनी गई थी। रोमन देवता जेनस के प्रतीक उनके दो चेहरे हैं। एक चेहरा भूतकाल (पिछले साल) को, तो दूसरा चेहरा भविष्य को देख सकता था। हर नए साल का जश्न मनाने के लिए रोमनवासी जेनस को बलि चढ़ाते थे और नागरिकों, राज्य और देवताओं के बीच नए सिरे से जुड़ने का संकल्प लेते थे। इसके अलावा, आपस में आशीर्वाद, मीठे फल और शहद जैसे उपहारों का
आदान-प्रदान किया जाता था। साथ ही, सम्राट के प्रति निष्ठा की प्रतिज्ञा की जाती थी। रोमनवासियों के नए साल के जश्न और संकल्प आध्यात्मिकता, सत्ता संरचनाओं और रोमन संस्कृति के सामाजिक ताने-बाने में अंतर्निहित थे।
■ शौर्य का युग
करीब 500 से 1500 ई. पूर्व के समय, जिसे मध्य युग के नाम से भी जाना जाता है, के दौरान शूरवीरों ने नए साल का उपयोग वीरता व बहादुरी की अपनी प्रतिज्ञाओं का नवीनीकरण करने के लिए किया। किंवदंतियों के अनुसार, सबसे प्रसिद्ध शौर्य प्रतिज्ञाओं में से एक 'मोर या तीतर की प्रतिज्ञा' थी। इसमें शूरवीर अपने हाथों को जीवित या भुने हुए मोर पर रखकर शूरवीरता के मूल्यों को बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिज्ञाओं के प्रति कसमें खाते थे। माना जाता है कि इन पक्षियों के शानदार और विभिन्न रंग राजाओं और महान व्यक्तियों की महिमा का प्रतीक थे। शासक, कुलीन वर्ग और जमींदारों की सेवा करता था। इस प्रकार, सामंती वर्ग (नाइटहुड) कुलीन सदस्यों के एक क्लब के समान हो गया। मध्य युग में, विभिन्न समाज नए साल को वर्ष के अलग-अलग समय पर मनाते थे। समय की गलत गणना के कारण जूलियन कैलेंडर में वर्ष 1,000 तक सात दिन अतिरिक्त जुड़ गए थे।
■ आधुनिक समय
आधुनिक काल में, पोप ग्रेगरी XIII ने जूलियन कैलेंडर की खामियों को ठीक करने के लिए 1582 में ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत की, जिससे आधिकारिक तौर पर एक जनवरी को नए साल की शुरुआत हुई। 19वीं सदी में लोग अक्सर धार्मिक आधार पर संकल्प लेते थे। उदाहरण के लिए, 19वीं शताब्दी में प्रोटेस्टेंटवाद ने धर्म, आध्यात्मिकता और नैतिक चरित्र से जुड़े संकल्पों पर जोर दिया। 1800 के दशक में कुछ सुबूत मिले हैं, जिनसे प्रमाणित होता है कि संकल्प हास्य का विषय भी बन गए थे। जैसे- वॉकर की हाइबरनियन पत्रिका (1802) ने राजनेताओं का मजाक उड़ाया, जिसमें उन्होंने 'अपने देश की भलाई के अलावा कोई और उद्देश्य न रखने' जैसे संकल्प लिए। 1671 में स्कॉटिश लेखिका ऐनी हेलकेट ने अपनी डायरी में संकल्प दर्ज किया, 'मैं अब किसी का अपमान नहीं करूंगी'। बावजूद इसके उन्होंने कई बार कइयों का अपमान किया। आज भी विभिन्न संस्कृतियों के लोग अलग-अलग समय नए साल का जश्न मनाते हैं, और संकल्प लेते हैं। जिस तरह प्राचीन सभ्यताएं समृद्ध फसल के लिए प्रार्थना करती थीं, उसी तरह आज के संकल्प भी सामाजिक मूल्यों को दर्शाते हैं। आज, संकल्प धार्मिक या सामाजिक दायित्वों के बजाय व्यक्तिगत विकास पर ज्यादा केंद्रित हैं। 4,000 वर्षों से अधिक समय से विकसित होने के बावजूद, नया साल नई शुरुआत व आशा का प्रतीक बना हुआ है, जो हर किसी को बेहतर भविष्य का सपना देखने का मौका देता है।
(द कन्वर्सेशन से साभार)
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