'हमारे अंदर जो कुछ है, उसके मुकाबले हमारे आगे और पीछे पड़ी चीजें कुछ भी नहीं हैं । '
सीमाओं से अपने दिमाग को मुक्ति दिलाने का पहला चरण है, सीमाओं के प्रति सजग हो जाना । प्रभावशाली लोग अपनी कमजोरियों को भली-भाँति जानते हैं, क्योंकि कमजोरियाँ चेन की सबसे कमजोर कड़ी होती हैं, इनको दूर करना जरूरी है । किन विश्वासों ने आपको जीवन की सफलता, खुशी, प्रेम और अपना मालिक आप बनने से आपको मरहूम रखा? वे कौन से विचार हैं, जिससे आपके मन की शांति छिन गयी है, आपके संबंधों की गर्माहट चली गयी और अच्छे स्वास्थ्य ने आपका दामन छोड़ दिया? इनको नोट कर लें । अपने दिमाग से इनको निकाल बाहर करने का संकल्प लें। आरंभ में यह काम कठिन लगेगा । बीच रास्ते में ही आपका हार मान लेने का दिल करेगा; लेकिन थोड़ी लगन से इनसे छुटकारा पाने में सफल होंगे ।
एक बार आप बाँध रखनेवाले विचारों को नोट कर लेते हैं और सचेत होकर अपनी चेतना से इनको हटाने में कामयाब हो जाते हैं, तो फिर उसकी जगह ऐसे नये विचार लायें जो आपको ऊर्जा से भर देता हो, आपको प्रेरित करता हो, आपके सपनों को उम्मीदों और उमंगों से भर देता हो । पूरब का युगों पुराना यह सिद्धांत इस तथ्य पर आधारित है कि एक समय में हमारे दिमाग में केवल एक विचार ही टिका रह सकता है। अगर हमारे मानस पटल पर आया विचार कमजोर बनानेवाला नकारात्मक है, तो उसकी जगह तत्काल सकारात्मक विचार ले लेता है । समय के साथ नकारात्मक विचार चंद या फिर नहीं के बराबर रह जाते है । क्योंकि प्रकृति का महान कानून कहता है कि सकारात्मक हमेशा नकारात्मक पर हावी होता है।
आप जैसा होने की कल्पना करते हैं, उसका अपने मानस पटल पर चित्र बनायें - उन सबका जिसको चाहने का आप कभी भी सपना देखे थे । आप जिन मौजूदा हालातों में हैं, उनमें इस तरह की सकारात्मक सोच और शक्तिशाली विचार आपको बेवकूफी भरा और समय की फिजूलखर्ची लग सकती है । लेकिन इस तरह के सकारात्मक मानसिक चित्र में विश्वास करने में एक आश्चर्यजनक शक्ति निहित है ।
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